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क्या सुब्रमण्यम का राजनीतिक वनवास समाप्त 

  • 16 Feb

    क्या सुब्रमण्यम का राजनीतिक वनवास समाप्त 

     

    सुब्रमण्यम स्वामी पिछले कुछ वर्षों से एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीती की मुख्यधारा में हैं।

    फिलहाल स्वामी ने कांग्रेस की नाक में दम कर रखा है। भारतीय राजनीति में उन्होंने अच्छे

    अच्छों का दम निकाला है और उनको देखते ही कईयों का दम निकल जाता है, यह भी सभी

    जानते हैं। डा स्वामी का जन्म 15 सितम्बर, 1939 को प्रातः 04:30 बजे चेन्नई में हुआ है. इस

    आधार पर इनका लग्न सिंह और इनकी राशि कन्या बनती है. इनका जन्म नक्षत्र हस्त है.

    इनका लग्न स्वामी सूर्य लग्न में ही स्वराशि में बैठा है. इनका मंगल चतुर्थेश और नवमेश होकर छठे

    स्थान में उच्च का होकर बैठा है. इसलिए इनको हराना बहुत टेढ़ी खीर है. इनका गुरु वक्री होकर अष्टम

    स्थान में स्वग्रही होकर बैठ गया जो पंचम भाव का भी मालिक है. इसलिए इनके ज्ञान का स्तर इतना

    उच्च है और इनके अंतर्ज्ञान की विद्या भी विकसित है. लेकिन शुक्र और शनि नीच का होकर क्रमशः

    द्वितीय और नवं भाव में विराजमान है.

    स्वग्रही गुरु के कारण उच्च शिक्षा, उत्कृष्ट लेखन कला आदि संभव हुआ. हार्वर्ड विश्वविद्यालय

    से अर्थशास्त्र में डॉक्ट्रेट की उपाधि प्राप्त करने के बाद उन्होंने साइमन कुजनैट्स और पॉल

    सैमुअल्सन के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर शोध कार्य किया और फिर पॉल सैमुअल्सन के साथ

    संयुक्त लेखक के रूप में इण्डैक्स नम्बर थ्यौरी का एकदम नवीन और पथ प्रदर्शक अध्ययन

    प्रस्तुत किया। ये हार्वर्ड विश्वविद्यालय के विजिटिंग फैकल्टी मैम्बर भी रहे हैं। ये ऐसे व्यक्ति हैं

    जिन्होंने अपने आदर्शों के लिए निर्भीक होकर संघर्ष किया है। भारत में आपातकाल के दौरान

    संघर्ष, तिब्बत में कैलाश-मानसरोवर यात्री मार्ग खुलवाने में उनके प्रयास, भारत-चीन सम्बन्धों में

    सुधार, भारत द्वारा इजरायल की राजनैतिक स्वीकारोक्ति, आर्थिक सुधार और हिन्दू पुनरुस्थान

    आदि अनेक उल्लेखनीय कार्य उन्होंने किये हैं।

    स्वामी जी का मंगल उच्च का होकर छठे भाव में विराजमान है, इसलिए ये दुश्मनों के दांत

    खट्टे करने में सफल रहते हैं. इनके राजनीतिक शत्रु इनके नाम से कांपते हैं. अपनी विशिष्ट

    कार्यशैली और सक्रियता से राजनीति में सुब्रमण्यम स्वामी एक अलग स्थान रखते हैं. कभी

    स्वामी की सियासत से सरकार की सांसें फूलने लगती हैं, तो कभी सरकार की सांसों में स्वामी

    जी संजीवनी भी डालते नजर आते हैं। इनकी न्यायिक सक्रियता ने इन्हें विशिष्टता दी है- 2जी

    घोटाला, जयललिता के भ्रस्टाचार के विरुद्ध केस, अयोध्या राम मंदिर, भारतीय मीडिया के विदेशी

    मालिको पर प्रतिबंध, नेशनल हेराल्ड घोटाला आदि वर्तमान में चर्चित हैं. अभी बुध की महादशा में

    गुरु की अन्तर्दशा चल रही है. बुध द्वितीयेश और एकादशेश है एवं गुरु पंचमेश और अष्टमेश है

    इसलिए इनके प्रभाव और आभामंडल में आशातीत वृद्धि होगी. राजनीतिक सक्रियता से ये

    चर्चाओं में बने रहेंगे. सितम्बर-अक्टूवर में इन्हें कोई बड़ी जीत या कोई बड़ा राजनीतिक पद

    मिलने की सम्भावना प्रबल है. हालाँकि वित्त मामलों के ये अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ माने जाते हैं,

    लेकिन इन्हें इससे सम्बंधित पद या जिम्मेदारी नहीं मिल पायेगी. पुरातन-पुरातत्व या सांस्कृतिक

    मामलों में इन्हें बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, क्योंकि अष्टमेश की अन्तर्दशा सक्रिय है और

    अष्टमेश गुरु हैं. चूँकि अन्तर्दशा अष्टमेश की है, इसलिय स्वास्थ्य मामलों में इन्हें काफी

    संभलकर रहने की आवश्यकता है. गंभीर बीमारी की प्रबल सम्भावना है.

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