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ममता के लिए 2016 का चुनाव जीतना आसान नहीं होगा

  • 16 Feb

    ममता के लिए 2016 का चुनाव जीतना आसान नहीं होगा

     

    अभी ममता बनर्जी कई कारणों से चर्चा की केंद्र-विन्दु बनी हुई हैं. मालदा में सांप्रदायिक उपद्रव

    जिसमे व्यापक क्षति हुई है, अभी चर्चा का विषय बना हुआ है. इसी समय इन्होने पाकिस्तानी

    गायक गुलाम अली का संगीत का कार्यक्रम रख लिया, जो पहले मुंबई में होना था और

    पाकिस्तान से तनावपूर्ण संबंधों को देखते हुए बड़े पैमाने पर विरोध के कारण इसे रद्द कर देना

    पड़ा था. वहीँ इस कार्यक्रम को लेकर ममता पर यह आरोप भी लगे कि उन्होंने तुष्टिकरण की

    राजनीती के तहत जानबूझ कर गुलाम अली को बुलाया. उल्लेखनीय हैकि एप्रिल 2016 में

    बंगाल में विधानसभा चुनाव होने हैं. ममता ने इसका आगाज़ भी कर दिया है और चुनौती दी

    हैकि सभी विपक्षी पार्टियाँ मिलकर भी उन्हें नहीं हरा सकती.

    ममता बनर्जी को जुझारू व कर्मठ नेता के रूप में जाना जाता है। यही कारण है कि जनता का

    प्यार उन्हें लगातार मिल रहा है। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में इनकी पार्टी तृणमूल

    कांग्रेस तीसरी सबसे पड़ी पार्टी बनकर उभरी है। सुश्री ममता बनर्जी का जन्म 5 जनवरी 1955 को

    मकर लग्न में हुआ है और द्वितीय भाव मे कुम्भ का 'मंगल', पंचम भाव मे वृष का उच्च का

    'चंद्रमा', षष्ठम भाव मे मिथुन का 'केतू', सप्तम भाव मे कर्क का 'वक्री गुरु', दशम भाव मे तुला

    का उच्च का 'शनि', एकादश भाव मे वृश्चिक का 'शुक्र' और द्वादश भाव मे धनु के 'सूर्य','बुध'

    और 'राहू' हैं. 2016 में शनि की महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा चल रही है.

    उच्च का शनि, जो लग्नेश और द्वितीयेश भी है, होने के कारण 34 साल से राज्य की सत्ता पर

    काबिज वाम मोर्चे की सरकार को 2011 में हटाकर राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने वाली

    ममता अपनी राजनीति की वजह से कद्दावर नेताओं की जमात में आगे खड़ी हैं. सूती साड़ी, पैरों

    में हवाई चप्पल, कंधे पर कपड़े का थैला और चेहरे पर आम आदमी जैसे संघर्ष के भाव कुल

    मिलाकर इनकी सादगी भरी पहचान है. चूँकि इनका चन्द्रमा भी उच्च का है जो सप्तमेश होकर

    पंचन भाव में बैठा है, जिस कारण ये कुछ मनमाने फैसले लेती हैं लेकिन जो फैसला लेती हैं,

    उसे पूरा करती हैं, चाहे कितनी भी बाधाएं आये.

    लग्नेश शनि की महादशा में शुक्र के अंतर के कारण आने वाला समय ममता बनर्जी के लिए

    अच्छा रहेगा। इस साल इनकी कीर्ति, पराक्रम व प्रतिष्ठा का ग्राफ और ऊपर जाएगा और ये

    समय भाग्यशाली साबित होगा। राजनीतिक हलकों में इनकी बात को महत्व दिया जाएगा। लेकिन

    कठिन संघर्ष के बिना कुछ नहीं मिलेगा. जनता से सीधे संवाद की स्थिति बनानी पड़ेगी. गोचर

    में चन्द्र से चतुर्थ भाव में राहू और गुरु हैं, जिसे गोचर शनि दशम दृष्टि से देख रहा है, ऐसे में

    पार्टी में अंतर्कलह शीर्ष पर होगा जिसे रोक पाने में ममता को बहुत परेशानी भी होगी. शनि के

    द्वारा चन्द्रमा के पीड़ित हो जाने से इनके कुछ फैसले सनक भरे हो सकते हैं, जिसके दूरगामी

    परिणाम इनको भुगतने पड़ेंगे. राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थितिया भी गंभीर संकट पैदा

    करेंगी, जिससे निपटाना आसान नहीं होगा. बलात्कार, हत्या, मारपीट, राजनीतिक हिंसा आदि बढ़

    सकते हैं. हालाँकि अभी इनके लिए समय अच्छा चल रहा है, लेकिन यदि ये पार्टी की अंदरूनी

    लड़ाई, ख़राब कानून-व्यवस्था और अटपटे फैसले लेने आदि में सुधार कर लेती हैं तो इन्हें

    आगामी विधान सभा चुनाव में सफलता मिल सकती है.

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