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वर्ष 2016 में विकास की गति युवाओं को कितना लुभा

  • 16 Feb

    वर्ष 2016 में विकास की गति युवाओं को कितना लुभा

     

    अगर भारत की कुंडली पर चर्चा करे तो भारत की कुंडली उसके स्वत्रंत्रता दिवस से बनाई जाती

    है. कुंडली विवरण - तिथि 15 अगस्त 1947, समय रात्रि 00:00, स्थान दिल्ली. इससे वृषभ

    लग्न तथा कर्क राशि की कुंडली बनती है. कर्क राशी की प्रकृति एक कुटिल व सफल

    राजनीतिक, बात का धनी, चतुर स्वाभाव वाला होता है. लेकिन वृषभ लग्न का स्वाभाव बड़ा ही

    शांति प्रिय, कष्ट सहने वाला, समझौतावादी, मेहनती व संघर्षरत, भोले स्वाभाव वाला, सहनशील

    और सामाजिक जिम्मेदारियों को ढोने वाला होता है.

    इस वर्ष रजा शुक्र, मंत्री बुध ग्रह हैं. यह वर्ष देश और सरकार के लिए चुनौतियों भरा रहेगा.

    मंहगाई पर नियंत्रण, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं पर बाद में चर्चा करेंगे. अभी हम देखते

    हैं कि क्या विकास को गति मिलेगी और युवाओं को आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे? राशि से

    दुसरे भाव में राहू-गुरु का गोचर चल रहा है, जिससे आर्थिक सुधारों को गति मिलने की

    सम्भावना प्रबल है. भारत वर्ष 2016 में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हासिल कर दुनिया की बड़ी

    अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज वृद्धि दर्ज करने वाली अर्थव्यवस्था होगी. संयुक्त राष्ट्र की विश्व

    अर्थव्यवस्था रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है. इसे बल देने वाले कारक गुरु भाग्य भाव के

    भी स्वामी हैं. इसलिए सकारात्मक बात यह रहेगी कि देश आर्थिक रूप से आगे बढ़ेगा।

     अर्थव्यस्था मजबूत होगी। वित्तीय व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन आएंगे जिससे आम आदमी

    लाभान्वित होगा।

    इस वर्ष की शुरुआत में पुरुष ग्रहों का सम्बन्ध अनुकूल है. 1 जनवरी को सूर्य धनु राशि में था.

    विशेष बात यह है कि प्रशासनिक सेवा और रोजी-रोजगार तथा ज्ञान का हेतु ग्रह गुरु सिंह राशि

    में है, इसलिए वर्ष के आरम्भ में ये राशि परिवर्तन योग विशेष राजयोग बना रहा है. नौकरियों

    की सम्भावना में आशातीत वृद्धि होगी. युवाओं को रोजगार मिलेंगे. युवाओं के लिए जो

    स्टार्टअप योजना चलाई जा रही है और जिस हिसाब से इसमें विभिन्न प्रकार की छूट और अन्य

    प्रोत्साहन के उपाय किये गए हैं, उससे युवाओं को भरपूर अवसर प्राप्त होंगे. युवा सरकारी

    योजनाओं और नौकरियों की तरफ आकर्षित होंगे. शिक्षा के क्षेत्र में भी सफलता के भरपूर

    अवसर मिलेंगे. बुध के कारण युवा दक्षता प्राप्ति की और ज्यादा ध्यान देंगे.

    2016 में भारत अंतरिक्ष विज्ञान में नई सफलताएं हासिल कर विकास को अधिक गति दे सकता

    है। देश में गरीबी दूर करने और विकसित भारत के सपने को पूरा करने में इसरो की इस तरह

    अंतरिक्ष में सफलता की प्रबल सम्भावना बन रही है. भविष्य में अंतरिक्ष में प्रतिस्पर्धा बढेगी

    क्योकि यह अरबों डॉलर का मार्केट है।

    वर्ष कुंडली के आधार पर 15 अगस्त 2015 को सुबह 10 बजकर 28 मिनट पर कन्या लग्न में

    भारत 68 वें वर्ष में प्रवेश कर चूका है. वर्ष कुंडली के पंचम भाव को देख रहे शनि, मंगल, और

    शुक्र देश की शिक्षा और खेल सम्बन्धी नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन की और इशारा कर रहे है

    जो युवा वर्ग को खूब लुभाएगा। चतुर्थ भाव, जो की कृषि से संबंध रखता है, पर गुरु की दृष्टि

    होने से किसानों और पशु पालकों के लिए स्वर्णिम अवसर साबित हो सकते हैं.

    राहु-गुरु की सिंह राशि में वर्तमान युति और शनि-मंगल की वृश्चिक राशि में होने वाली युति

    आर्थिक मंदी ले कर आएगी जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा. ऐसी परिस्थिति में ‘मेक इन

    इंडिया' के नारे के साथ विदेशी निवेशकों को लुभाने निकले प्रधानमंत्री मोदी झटका झेलना पड़

    सकता है क्योंकि ज्योतिषशास्त्र के हिसाब से विश्व के बड़े देशों की अर्थव्यस्था ही मंदी की चपेट

    में फंस सकती है.

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